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सर्ग 26: सीता का करुण-विलाप तथा अपने प्राणों को त्याग देने का निश्चय करना
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श्लोक 27
श्लोक
5.26.27
नूनं लङ्का हते पापे रावणे राक्षसाधिपे।
शोषमेष्यति दुर्धर्षा प्रमदा विधवा यथा॥ २७॥
अनुवाद
पापी राक्षसराज रावण के मरने पर यह दुःखमय लंकापुरी विधवा कन्या की भाँति अवश्य ही सूखकर नष्ट हो जाएगी॥27॥
After the death of the sinful demon king Ravana, this miserable Lankapuri will surely dry up and be destroyed like a widowed girl. 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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