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श्लोक 5.26.25  |
अचिरेणैव कालेन प्राप्स्याम्येनं मनोरथम्।
दुष्प्रस्थानोऽयमाभाति सर्वेषां वो विपर्यय:॥ २५॥ |
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| अनुवाद |
| वह समय शीघ्र ही आ रहा है जब मेरी यह इच्छा पूर्ण होगी। ऐसा स्पष्ट प्रतीत होता है कि तुम सबका यह दुराचार शीघ्र ही तुम्हारे लिए प्रतिकूल परिणाम लाएगा॥ 25॥ |
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| ‘The time is coming soon when this desire of mine will be fulfilled. It seems clear that this misconduct of all of you will soon bring adverse results for you.॥ 25॥ |
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