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श्लोक 5.26.19  |
कृतं कर्म महत् तेन मां तथाभ्यवपद्यता।
तिष्ठता रावणवधे वृद्धेनापि जटायुषा॥ १९॥ |
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| अनुवाद |
| यद्यपि जटायु बूढ़ा था, फिर भी मुझ पर दया करके उसने महान् प्रयास किया था और रावण को मारने के लिए तैयार हो गया था॥19॥ |
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| Although Jatayu was old, yet by taking pity on me he had performed a great effort and was ready to kill Ravana.॥ 19॥ |
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