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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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सर्ग 26: सीता का करुण-विलाप तथा अपने प्राणों को त्याग देने का निश्चय करना
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श्लोक 19
श्लोक
5.26.19
कृतं कर्म महत् तेन मां तथाभ्यवपद्यता।
तिष्ठता रावणवधे वृद्धेनापि जटायुषा॥ १९॥
अनुवाद
यद्यपि जटायु बूढ़ा था, फिर भी मुझ पर दया करके उसने महान् प्रयास किया था और रावण को मारने के लिए तैयार हो गया था॥19॥
Although Jatayu was old, yet by taking pity on me he had performed a great effort and was ready to kill Ravana.॥ 19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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