श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 26: सीता का करुण-विलाप तथा अपने प्राणों को त्याग देने का निश्चय करना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.26.17 
इहस्थां मां न जानीते शङ्के लक्ष्मणपूर्वज:।
जानन्नपि स तेजस्वी धर्षणां मर्षयिष्यति॥ १७॥
 
 
अनुवाद
मुझे संदेह है कि लक्ष्मणजी के बड़े भाई श्री रामचन्द्रजी को मेरी लंका में उपस्थिति का पता नहीं है। यदि उन्हें मेरी उपस्थिति का पता होता, तो उनके समान तेजस्वी पुरुष अपनी पत्नी का यह अपमान कैसे सहन कर पाते?॥17॥
 
‘I suspect that Lakshmanji's elder brother Shri Ramchandraji does not know about my presence in Lanka. If he had known about my presence here, then how could a man as brilliant as him tolerate this insult of his wife?॥ 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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