श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 26: सीता का करुण-विलाप तथा अपने प्राणों को त्याग देने का निश्चय करना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  5.26.15 
कामं मध्ये समुद्रस्य लङ्केयं दुष्प्रधर्षणा।
न तु राघवबाणानां गतिरोधो भविष्यति॥ १५॥
 
 
अनुवाद
यह लंका समुद्र के बीच में स्थित है, इसलिए यहाँ किसी के लिए भी आक्रमण करना कठिन हो सकता है; परंतु श्री रघुनाथजी के बाणों का वेग यहाँ भी नहीं रोका जा सकता॥ 15॥
 
This Lanka is situated in the middle of the ocean, so it may be difficult for anyone to attack here; but the speed of Sri Raghunath's arrows cannot be obstructed even here.॥ 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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