श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 26: सीता का करुण-विलाप तथा अपने प्राणों को त्याग देने का निश्चय करना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  5.26.12 
राक्षसानां जनस्थाने सहस्राणि चतुर्दश।
एकेनैव निरस्तानि स मां किं नाभिपद्यते॥ १२॥
 
 
अनुवाद
‘अन्यथा जिसने जनस्थान में अकेले ही चौदह हजार राक्षसों का वध किया, वह मेरे पास क्यों नहीं आता?॥12॥
 
‘Otherwise why is He who single-handedly killed fourteen thousand demons in Janasthan not coming to me?॥ 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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