| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 5: सुन्दर काण्ड » सर्ग 26: सीता का करुण-विलाप तथा अपने प्राणों को त्याग देने का निश्चय करना » श्लोक 11 |
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| | | | श्लोक 5.26.11  | ख्यात: प्राज्ञ: कृतज्ञश्च सानुक्रोशश्च राघव:।
सद्वृत्तो निरनुक्रोश: शङ्के मद्भाग्यसंक्षयात्॥ ११॥ | | | | | | अनुवाद | | श्री रघुनाथजी अपने ज्ञान, कृतज्ञता, सदाचार और परम करुणा के लिए जगत में विख्यात हैं; तथापि मुझे संदेह है कि कहीं मेरे धन के नष्ट हो जाने के कारण वे मुझ पर क्रूर तो नहीं हो गए हैं॥ 11॥ | | | | Sri Raghunatha is world-renowned for his knowledge, gratitude, good conduct and utmost compassion. However, I am doubtful whether he has become cruel towards me due to the loss of my fortune.॥ 11॥ | | ✨ ai-generated | | |
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