| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 5: सुन्दर काण्ड » सर्ग 26: सीता का करुण-विलाप तथा अपने प्राणों को त्याग देने का निश्चय करना » श्लोक 10 |
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| | | | श्लोक 5.26.10  | छिन्ना भिन्ना प्रभिन्ना वा दीप्ता वाग्नौ प्रदीपिता।
रावणं नोपतिष्ठेयं किं प्रलापेन वश्चिरम्॥ १०॥ | | | | | | अनुवाद | | हे राक्षसों! इतनी देर तक तुम्हारे बड़बड़ाने से क्या लाभ? तुम मुझे छेद डालो, चीर डालो, टुकड़े-टुकड़े कर दो, आग में भून डालो या जलाकर राख कर दो, तो भी मैं रावण के पास नहीं जा सकता॥ 10॥ | | | | ‘O demons! What is the use of your blabbering for so long? You may pierce me, rip me apart, tear me into pieces, roast me in fire or burn me to ashes, even then I cannot go near Ravana.॥ 10॥ | | ✨ ai-generated | | |
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