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श्लोक 5.25.3  |
न मानुषी राक्षसस्य भार्या भवितुमर्हति।
कामं खादत मां सर्वा न करिष्यामि वो वच:॥ ३॥ |
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| अनुवाद |
| हे राक्षसों! मनुष्य कन्या कभी राक्षस की पत्नी नहीं हो सकती। तुम चाहो तो सब मिलकर मुझे खा सकते हो, परन्तु मैं तुम्हारी बात नहीं मानूँगी।॥3॥ |
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| ‘O demons! A human girl can never be the wife of a demon. If you wish, you all may eat me together, but I will not listen to you.'॥ 3॥ |
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