श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 25: राक्षसियों की बात मानने से इनकार करके शोक-संतप्त सीता का विलाप करना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.25.3 
न मानुषी राक्षसस्य भार्या भवितुमर्हति।
कामं खादत मां सर्वा न करिष्यामि वो वच:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
हे राक्षसों! मनुष्य कन्या कभी राक्षस की पत्नी नहीं हो सकती। तुम चाहो तो सब मिलकर मुझे खा सकते हो, परन्तु मैं तुम्हारी बात नहीं मानूँगी।॥3॥
 
‘O demons! A human girl can never be the wife of a demon. If you wish, you all may eat me together, but I will not listen to you.'॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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