Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.25.19: मैं इन राक्षसों के आश्रय में अपने प्रियतम भगवान् राम को कभी नहीं पा सकूँगा। अतः मैं महान शोक से व्याकुल हूँ और इससे तंग आकर मैं अपने प्राण त्यागना चाहता हूँ॥ 19॥ | ramayan सर्ग 5.25: राक्षसियों की बात मानने से इनकार करके शोक-संतप्त सीता का विलाप करना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मैं इन राक्षसों के आश्रय में अपने प्रियतम भगवान् राम को कभी नहीं पा सकूँगा। अतः मैं महान शोक से व्याकुल हूँ और इससे तंग आकर मैं अपने प्राण त्यागना चाहता हूँ॥ 19॥
I will never be able to find my beloved Lord Rama under the protection of these demons. So I am overcome with great grief and tired of this, I want to end my life.॥ 19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥