श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 24: सीताजी का राक्षसियों की बात मानने से इनकार कर देना तथा राक्षसियों का उन्हें मारने-काट ने की धमकी देना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.24.4 
त्रैलोक्यवसुभोक्तारं रावणं राक्षसेश्वरम्।
भर्तारमुपसंगम्य विहरस्व यथासुखम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
‘तुम तीनों लोकों का ऐश्वर्य भोगने वाले राक्षसराज रावण को पतिरूप में पाकर सुखपूर्वक विचरण करो॥4॥
 
‘You roam happily after finding the demon king Ravana, who enjoys the opulence of the three worlds, as your husband. 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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