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श्लोक 5.24.33  |
अलमश्रुनिपातेन त्यज शोकमनर्थकम्।
भज प्रीतिं प्रहर्षं च त्यजन्ती नित्यदैन्यताम्॥ ३३॥ |
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| अनुवाद |
| आँसू बहाने से कुछ नहीं होगा। इस व्यर्थ शोक को त्याग दो। निरन्तर दुःख को दूर करो और अपने हृदय में सुख और आनन्द को स्थान दो॥ 33॥ |
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| ‘Nothing is going to happen by shedding tears. Give up this useless mourning. Remove the constant misery and give place to happiness and joy in your heart.॥ 33॥ |
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