श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 24: सीताजी का राक्षसियों की बात मानने से इनकार कर देना तथा राक्षसियों का उन्हें मारने-काट ने की धमकी देना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.24.3 
मानुषी मानुषस्यैव भार्यात्वं बहु मन्यसे।
प्रत्याहर मनो रामान्नैवं जातु भविष्यति॥ ३॥
 
 
अनुवाद
तू मनुष्य है, इसलिए तू पुरुष की पत्नी के पद को अधिक महत्व देती है; परंतु अब तू अपना मन राम से हटा ले, अन्यथा तू कभी जीवित नहीं रहेगी॥3॥
 
You are a human being, therefore you give more importance to the position of a man's wife; but now you should turn your mind away from Rama, otherwise you will never survive.॥ 3॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd