vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 5: सुन्दर काण्ड
»
सर्ग 23: राक्षसियों का सीताजी को समझाना
»
श्लोक 7
श्लोक
5.23.7
पुलस्त्यस्य तु तेजस्वी महर्षिर्मानस: सुत:।
नाम्ना स विश्रवा नाम प्रजापतिसमप्रभ:॥ ७॥
अनुवाद
'पुलस्त्यजी के पुत्र यशस्वी महर्षि विश्रवा हैं।' वह भी प्रजापति के समान चमकता है॥ 7॥
‘The son of Pulastyaji is the illustrious Maharishi Vishrava. He too shines like Prajapati.॥ 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×