श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 23: राक्षसियों का सीताजी को समझाना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.23.7 
पुलस्त्यस्य तु तेजस्वी महर्षिर्मानस: सुत:।
नाम्ना स विश्रवा नाम प्रजापतिसमप्रभ:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
'पुलस्त्यजी के पुत्र यशस्वी महर्षि विश्रवा हैं।' वह भी प्रजापति के समान चमकता है॥ 7॥
 
‘The son of Pulastyaji is the illustrious Maharishi Vishrava. He too shines like Prajapati.॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)