श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 23: राक्षसियों का सीताजी को समझाना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.23.6 
प्रजापतीनां षण्णां तु चतुर्थोऽयं प्रजापति:।
मानसो ब्रह्मण: पुत्र: पुलस्त्य इति विश्रुत:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
'विदेहकुमारी! पुलस्त्यजी छह प्रजापतियों में चौथे हैं और ब्रह्माजी के मानस पुत्र हैं। इस रूप में वे सर्वत्र विख्यात हैं। 6॥
 
‘Videhkumari! Pulastyaji is the fourth among the six Prajapatis and is the mental son of Brahmaji. In this form he is famous everywhere. 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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