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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 23: राक्षसियों का सीताजी को समझाना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  5.23.16 
ततस्तां दुर्मुखी नाम राक्षसी वाक्यमब्रवीत्।
यस्य सूर्यो न तपति भीतो यस्य स मारुत:।
न वाति स्मायतापाङ्गि किं त्वं तस्य न तिष्ठसे॥ १६॥
 
 
अनुवाद
तब दुर्मुखी नाम की राक्षसी ने उससे कहा - 'विशालोचने! जिसके भय से सूर्य चमकना और वायु चलना बंद कर देती है, उसके पास तुम क्यों नहीं रहतीं?॥ 16॥
 
Then the demoness named Durmukhi said to her, 'Vishalochane! Why don't you stay with the one in whose fear the sun stops shining and the wind stops moving?॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)