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श्लोक 5.23.16  |
ततस्तां दुर्मुखी नाम राक्षसी वाक्यमब्रवीत्।
यस्य सूर्यो न तपति भीतो यस्य स मारुत:।
न वाति स्मायतापाङ्गि किं त्वं तस्य न तिष्ठसे॥ १६॥ |
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| अनुवाद |
| तब दुर्मुखी नाम की राक्षसी ने उससे कहा - 'विशालोचने! जिसके भय से सूर्य चमकना और वायु चलना बंद कर देती है, उसके पास तुम क्यों नहीं रहतीं?॥ 16॥ |
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| Then the demoness named Durmukhi said to her, 'Vishalochane! Why don't you stay with the one in whose fear the sun stops shining and the wind stops moving?॥ 16॥ |
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