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ramayan 5.22.6: ‘मिथिलेशकुमारी! तुम मुझसे जो कठोर बातें कह रही हो, उसके लिए यही उचित है कि तुम्हें मृत्युदंड की कठोरतम सजा दी जाए।’॥6॥   |   ramayan सर्ग 5.22: रावण का सीता को दो मास की अवधि देना, सीता का उसे फटकारना, फिर रावण का उन्हें धमकाना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 22: रावण का सीता को दो मास की अवधि देना, सीता का उसे फटकारना, फिर रावण का उन्हें धमकाना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.22.6 
परुषाणि हि वाक्यानि यानि यानि ब्रवीषि माम्।
तेषु तेषु वधो युक्तस्तव मैथिलि दारुण:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
‘मिथिलेशकुमारी! तुम मुझसे जो कठोर बातें कह रही हो, उसके लिए यही उचित है कि तुम्हें मृत्युदंड की कठोरतम सजा दी जाए।’॥6॥
 
‘Mithileshkumari! For all the harsh things you are saying to me, it is only fair that you be given the harshest punishment of death.’॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)