श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 22: रावण का सीता को दो मास की अवधि देना, सीता का उसे फटकारना, फिर रावण का उन्हें धमकाना  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  5.22.46 
स मैथिलीं धर्मपरामवस्थितां
प्रवेपमानां परिभर्त्स्य रावण:।
विहाय सीतां मदनेन मोहित:
स्वमेव वेश्म प्रविवेश रावण:॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार अपने कर्तव्य में दृढ़, मन में दृढ़ और भय से काँपती हुई मिथिलेशकुमारी सीता को धमकाकर काम से मोहित हुआ रावण अपने महल में चला गया ॥46॥
 
In this way, after threatening Mithileshkumari Sita, who was steadfast in her duty, steadfast in her mind and trembling with fear, Ravana, infatuated with lust, went to his own palace. 46॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये सुन्दरकाण्डे द्वाविंश: सर्ग:॥ २२॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके सुन्दरकाण्डमें बाईसवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ २२॥
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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