vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 5: सुन्दर काण्ड
»
सर्ग 22: रावण का सीता को दो मास की अवधि देना, सीता का उसे फटकारना, फिर रावण का उन्हें धमकाना
»
श्लोक 44
श्लोक
5.22.44
प्रस्थित: स दशग्रीव: कम्पयन्निव मेदिनीम्।
ज्वलद्भास्करसंकाशं प्रविवेश निवेशनम्॥ ४४॥
अनुवाद
अशोकवाटिका से प्रस्थान करके दशग्रीव अपने महल में प्रविष्ट हुआ जो पृथ्वी को कम्पित करने वाले सूर्य के समान प्रकाशित हो रहा था ॥44॥
Departing from the Ashokavatika, Dashagriva entered his palace which was illuminated like the bright sun, making the earth tremble. 44॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas