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ramayan 5.22.41-42h: "महाराज! निश्चय ही देवताओं में श्रेष्ठ ब्रह्माजी ने आपके बल से अर्जित दिव्य एवं उत्तम सुखों को अपने भाग्य में नहीं लिखा है। 41 1/2।   |   ramayan सर्ग 5.22: रावण का सीता को दो मास की अवधि देना, सीता का उसे फटकारना, फिर रावण का उन्हें धमकाना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.22.41-42h 
नूनमस्यां महाराज न देवा भोगसत्तमान्॥ ४१॥
विदधत्यमरश्रेष्ठास्तव बाहुबलार्जितान्।
 
 
अनुवाद
"महाराज! निश्चय ही देवताओं में श्रेष्ठ ब्रह्माजी ने आपके बल से अर्जित दिव्य एवं उत्तम सुखों को अपने भाग्य में नहीं लिखा है। 41 1/2।
 
"Maharaj! Surely the greatest of gods Brahmaji has not written in his destiny the divine and excellent pleasures earned by your strength. 41 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)