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ramayan 5.22.31: हे अन्यायी और दरिद्र पुरुष का अनुसरण करने वाली स्त्री! जैसे सूर्य भगवान अपने तेज से प्रातः और सायंकाल के अंधकार को नष्ट कर देते हैं, उसी प्रकार मैं आज तेरा नाश करता हूँ।॥31॥   |   ramayan सर्ग 5.22: रावण का सीता को दो मास की अवधि देना, सीता का उसे फटकारना, फिर रावण का उन्हें धमकाना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.22.31 
अनयेनाभिसम्पन्नमर्थहीनमनुव्रते।
नाशयाम्यहमद्य त्वां सूर्य: संध्यामिवौजसा॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
हे अन्यायी और दरिद्र पुरुष का अनुसरण करने वाली स्त्री! जैसे सूर्य भगवान अपने तेज से प्रातः और सायंकाल के अंधकार को नष्ट कर देते हैं, उसी प्रकार मैं आज तेरा नाश करता हूँ।॥31॥
 
O woman who follows the unjust and poor man! Just as the Sun God destroys the darkness of the morning and evening with his brilliance, in the same way I destroy you today.' ॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)