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ramayan 5.22.23: सीता के ये शब्द सुनकर राक्षसराज रावण ने जनकपुत्री को घूरा। उसकी दृष्टि क्रूरता से भरी हुई थी।   |   ramayan सर्ग 5.22: रावण का सीता को दो मास की अवधि देना, सीता का उसे फटकारना, फिर रावण का उन्हें धमकाना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.22.23 
सीताया वचनं श्रुत्वा रावणो राक्षसाधिप:।
विवृत्य नयने क्रूरे जानकीमन्ववैक्षत॥ २३॥
 
 
अनुवाद
सीता के ये शब्द सुनकर राक्षसराज रावण ने जनकपुत्री को घूरा। उसकी दृष्टि क्रूरता से भरी हुई थी।
 
Hearing these words of Sita, the demon king Ravana glared at Janak's daughter. His gaze was dripping with cruelty.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)