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ramayan 5.22.14: जैसे शचि इन्द्र की पत्नी है, वैसे ही मैं भी धर्मात्मा भगवान् श्री राम की पत्नी हूँ। तुम्हारे अतिरिक्त तीनों लोकों में ऐसा कौन है जो मन से भी मुझे प्राप्त करने की इच्छा रखता हो।   |   ramayan सर्ग 5.22: रावण का सीता को दो मास की अवधि देना, सीता का उसे फटकारना, फिर रावण का उन्हें धमकाना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 22: रावण का सीता को दो मास की अवधि देना, सीता का उसे फटकारना, फिर रावण का उन्हें धमकाना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  5.22.14 
मां हि धर्मात्मन: पत्नीं शचीमिव शचीपते:।
त्वदन्यस्त्रिषु लोकेषु प्रार्थयेन्मनसापि क:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
जैसे शचि इन्द्र की पत्नी है, वैसे ही मैं भी धर्मात्मा भगवान् श्री राम की पत्नी हूँ। तुम्हारे अतिरिक्त तीनों लोकों में ऐसा कौन है जो मन से भी मुझे प्राप्त करने की इच्छा रखता हो।
 
‘Just as Shachi is the wife of Indra, similarly I am the wife of the virtuous Lord Shri Ram. Who else in the three worlds, apart from you, even in his mind desires to attain me.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)