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ramayan 5.22.13: निश्चय ही इस नगर में कोई भी ऐसा मनुष्य नहीं है जो तुम्हारा भला चाहता हो, जो तुम्हें इस निंदनीय कार्य से रोक सके।   |   ramayan सर्ग 5.22: रावण का सीता को दो मास की अवधि देना, सीता का उसे फटकारना, फिर रावण का उन्हें धमकाना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 22: रावण का सीता को दो मास की अवधि देना, सीता का उसे फटकारना, फिर रावण का उन्हें धमकाना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  5.22.13 
नूनं न ते जन: कश्चिदस्मिन्नि:श्रेयसि स्थित:।
निवारयति यो न त्वां कर्मणोऽस्माद् विगर्हितात्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
निश्चय ही इस नगर में कोई भी ऐसा मनुष्य नहीं है जो तुम्हारा भला चाहता हो, जो तुम्हें इस निंदनीय कार्य से रोक सके।
 
Certainly there is no man in this city who wishes well for you, who can stop you from this condemnable act.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)