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ramayan 5.22.12: उनके धैर्य को प्राप्त करके, अपने सदाचार (पतिभक्ति) और पतिव्रता पर गर्व से भरी हुई सीता ने राक्षसराज रावण से हितकर वचन कहे- 12॥   |   ramayan सर्ग 5.22: रावण का सीता को दो मास की अवधि देना, सीता का उसे फटकारना, फिर रावण का उन्हें धमकाना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.22.12 
ताभिराश्वासिता सीता रावणं राक्षसाधिपम्।
उवाचात्महितं वाक्यं वृत्तशौटीर्यगर्वितम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
उनके धैर्य को प्राप्त करके, अपने सदाचार (पतिभक्ति) और पतिव्रता पर गर्व से भरी हुई सीता ने राक्षसराज रावण से हितकर वचन कहे- 12॥
 
After gaining their patience, Sita, full of pride in her good conduct (devotion to her husband) and her husband's bravery, said beneficial words to the demon king Ravana - 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)