श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 21: सीताजी का रावण को समझाना और उसे श्रीराम के सामने नगण्य बताना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  5.21.22 
एवं हि ते भवेत् स्वस्ति सम्प्रदाय रघूत्तमे।
अन्यथा त्वं हि कुर्वाण: परां प्राप्स्यसि चापदम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार यदि तुम मुझे श्री रघुनाथजी को सौंप दोगे तो तुम्हारा कल्याण होगा, यदि इसके विपरीत आचरण करोगे तो महान् विपत्ति में पड़ोगे॥ 22॥
 
‘In this way, if you hand me over to Shri Raghunathji, it will be good for you. If you act contrary to this, you will fall into a great calamity.॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)