Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.20.9-10: मिथिलेशकुमारी! मुझे पाकर तू विचित्र मालाओं, चंदन, अगुरु, नाना प्रकार के वस्त्रों, दिव्य आभूषणों, बहुमूल्य पेयों, शय्या, आसन, नृत्य, गायन और वाद्यों का सुख भोग। 9-10॥ | ramayan सर्ग 5.20: रावण का सीताजी को प्रलोभन । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
विचित्राणि च माल्यानि चन्दनान्यगुरूणि च।
विविधानि च वासांसि दिव्यान्याभरणानि च॥ ९॥
महार्हाणि च पानानि शयनान्यासनानि च।
गीतं नृत्यं च वाद्यं च लभ मां प्राप्य मैथिलि॥ १०॥
अनुवाद
मिथिलेशकुमारी! मुझे पाकर तू विचित्र मालाओं, चंदन, अगुरु, नाना प्रकार के वस्त्रों, दिव्य आभूषणों, बहुमूल्य पेयों, शय्या, आसन, नृत्य, गायन और वाद्यों का सुख भोग। 9-10॥
Mithileshkumari! Having found me, enjoy the pleasures of strange garlands, sandalwood, aguru, different types of clothes, divine jewellery, precious drinks, bed, seat, dance, singing and musical instruments. 9-10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥