Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 5.20.26: राम ने विजय की आशा छोड़ दी है। वे यशहीन होकर वन-वन भटक रहे हैं, व्रत-उपवास कर रहे हैं और मिट्टी की वेदियों पर सो रहे हैं। अब मुझे संदेह होने लगा है कि वे जीवित भी हैं या नहीं॥ 26॥   |   ramayan सर्ग 5.20: रावण का सीताजी को प्रलोभन   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 20: रावण का सीताजी को प्रलोभन  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  5.20.26 
निक्षिप्तविजयो रामो गतश्रीर्वनगोचर:।
व्रती स्थण्डिलशायी च शंके जीवति वा न वा॥ २६॥
 
 
अनुवाद
राम ने विजय की आशा छोड़ दी है। वे यशहीन होकर वन-वन भटक रहे हैं, व्रत-उपवास कर रहे हैं और मिट्टी की वेदियों पर सो रहे हैं। अब मुझे संदेह होने लगा है कि वे जीवित भी हैं या नहीं॥ 26॥
 
Rama has given up the hope of victory. He is wandering from forest to forest without any glory, observing fasts and sleeping on earthen altars. Now I have started doubting whether he is even alive or not.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)