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ramayan 5.20.17: भीरु! मैं नाना लोकों से मंथन करके जो रत्न लाया हूँ, वे सब तुम्हारे होंगे और यह राज्य भी मैं तुम्हें सौंप दूँगा॥ 17॥   |   ramayan सर्ग 5.20: रावण का सीताजी को प्रलोभन   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 20: रावण का सीताजी को प्रलोभन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.20.17 
लोकेभ्यो यानि रत्नानि सम्प्रमथ्याहृतानि मे।
तानि ते भीरु सर्वाणि राज्यं चैव ददामि ते॥ १७॥
 
 
अनुवाद
भीरु! मैं नाना लोकों से मंथन करके जो रत्न लाया हूँ, वे सब तुम्हारे होंगे और यह राज्य भी मैं तुम्हें सौंप दूँगा॥ 17॥
 
Bhiru! All the gems that I have brought from various worlds after churning them will be yours and I will hand over this kingdom to you.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)