श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 2: लंकापुरी का वर्णन, उसमें प्रवेश करने के विषय में हनुमान जी का विचार, उनका लघुरूप से पुरी में प्रवेश तथा चन्द्रोदय का वर्णन  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  5.2.56 
स पाण्डुराविद्धविमानमालिनीं
महार्हजाम्बूनदजालतोरणाम्।
यशस्विनीं रावणबाहुपालितां
क्षपाचरैर्भीमबलै: सुपालिताम्॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
एक-दूसरे से सटे श्वेत रंग के सात मंजिला महलों की पंक्तियाँ लंकापुरी की शोभा बढ़ा रही थीं। वहाँ के घर जम्बू नाद नामक बहुमूल्य स्वर्ण जालियों और मालाओं से सुसज्जित थे। भयंकर और शक्तिशाली राक्षसों ने उस नगरी की अच्छी तरह रक्षा की थी। वह रावण के पराक्रम से भी सुरक्षित थी। उसके प्रताप की कीर्ति दूर-दूर तक फैली हुई थी। हनुमान जी ने ऐसी ही लंकापुरी में प्रवेश किया।
 
Rows of white coloured seven storied palaces adjoining each other were enhancing the beauty of Lankapuri. The houses there were decorated with precious gold lattices called Jambu Naad and garlands. The fierce and powerful demons protected that city well. It was also safe from the might of Ravana. The fame of his glory had spread far and wide. Hanuman ji entered such a Lankapuri.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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