श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 2: लंकापुरी का वर्णन, उसमें प्रवेश करने के विषय में हनुमान जी का विचार, उनका लघुरूप से पुरी में प्रवेश तथा चन्द्रोदय का वर्णन  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  5.2.42 
मयि दृष्टे तु रक्षोभी रामस्य विदितात्मन:।
भवेद् व्यर्थमिदं कार्यं रावणानर्थमिच्छत:॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
यदि राक्षस मुझे देख लेंगे तो रावण का नाश करने की इच्छा रखने वाले यशस्वी भगवान राम का यह कार्य सफल न होगा॥ 42॥
 
If the demons see me, then this task of the renowned Lord Rama, who wishes to destroy Ravana, will not be successful. ॥ 42॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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