श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 2: लंकापुरी का वर्णन, उसमें प्रवेश करने के विषय में हनुमान जी का विचार, उनका लघुरूप से पुरी में प्रवेश तथा चन्द्रोदय का वर्णन  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  5.2.31 
यावज्जानामि वैदेहीं यदि जीवति वा न वा।
तत्रैव चिन्तयिष्यामि दृष्ट्वा तां जनकात्मजाम्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
ठीक है, पहले मैं यह तो पता कर लूँ कि विदेहपुत्री सीता जीवित हैं या नहीं। जनकपुत्री से मिलने के बाद ही मैं इस विषय पर विचार करूँगा।'
 
Okay, first let me find out whether Videha's daughter Sita is alive or not. I will think about this matter only after meeting Janak's daughter.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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