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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 5: सुन्दर काण्ड
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सर्ग 2: लंकापुरी का वर्णन, उसमें प्रवेश करने के विषय में हनुमान जी का विचार, उनका लघुरूप से पुरी में प्रवेश तथा चन्द्रोदय का वर्णन
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श्लोक 30
श्लोक
5.2.30
चतुर्णामेव हि गतिर्वानराणां तरस्विनाम्।
वालिपुत्रस्य नीलस्य मम राज्ञश्च धीमत:॥ ३०॥
अनुवाद
‘यहाँ केवल चार वेगवान वानर ही पहुँच सकते हैं- बालिपुत्र अंगद, नीलाकि, मैं और बुद्धिमान राजा सुग्रीव॥30॥
‘Only four swift monkeys can reach here-Angada, son of Bali, Neelaki, me and the wise king Sugreeva.॥ 30॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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