श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 2: लंकापुरी का वर्णन, उसमें प्रवेश करने के विषय में हनुमान जी का विचार, उनका लघुरूप से पुरी में प्रवेश तथा चन्द्रोदय का वर्णन  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  5.2.28 
इमां त्वविषमां लंकां दुर्गां रावणपालिताम्।
प्राप्यापि सुमहाबाहु: किं करिष्यति राघव:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
इससे अधिक कठिन कोई स्थान नहीं है; महाबाहु श्री रघुनाथ रावण द्वारा शासित इस दुर्गम लंका में क्या करेंगे?॥ 28॥
 
There is no more difficult place than this; what will the mighty-armed Sri Raghunatha do in this inaccessible Lanka, ruled by Ravana?॥ 28॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd