vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 5: सुन्दर काण्ड
»
सर्ग 2: लंकापुरी का वर्णन, उसमें प्रवेश करने के विषय में हनुमान जी का विचार, उनका लघुरूप से पुरी में प्रवेश तथा चन्द्रोदय का वर्णन
»
श्लोक 26
श्लोक
5.2.26
तस्याश्च महतीं गुप्तिं सागरं च निरीक्ष्य स:।
रावणं च रिपुं घोरं चिन्तयामास वानर:॥ २६॥
अनुवाद
उस नगर में भारी सुरक्षा, चारों ओर समुद्र की खाइयाँ और रावण जैसे भयंकर शत्रु को देखकर हनुमानजी इस प्रकार विचार करने लगे-॥26॥
Seeing the heavy security in that city, the sea-ditch all around it, and a fearsome enemy like Ravana, Hanumanji began to think thus -॥ 26॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd