श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 2: लंकापुरी का वर्णन, उसमें प्रवेश करने के विषय में हनुमान जी का विचार, उनका लघुरूप से पुरी में प्रवेश तथा चन्द्रोदय का वर्णन  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  5.2.20 
पालितां राक्षसेन्द्रेण निर्मितां विश्वकर्मणा।
प्लवमानामिवाकाशे ददर्श हनुमान् कपि:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
कपिवर हनुमान ने विश्वकर्मा द्वारा निर्मित तथा राक्षसराज रावण द्वारा रक्षित उस पुरी को आकाश में तैरते हुए देखा॥20॥
 
Kapivar Hanuman saw that Puri, built by Vishwakarma and protected by the demon king Ravana, floating in the sky. 20॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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