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ramayan 5.19.7: मन रूपी रथ पर सवार होकर, संकल्प रूपी घोड़ों से जुते हुए, आत्मज्ञानी राजा ऐसे प्रतीत हो रहे थे मानो वे भगवान राम की ओर जा रहे हों।   |   ramayan सर्ग 5.19: रावण को देखकर दुःख, भय और चिन्ता में डूबी हुई सीता की अवस्था का वर्णन   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.19.7 
समीपं राजसिंहस्य रामस्य विदितात्मन:।
संकल्पहयसंयुक्तैर्यान्तीमिव मनोरथै:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
मन रूपी रथ पर सवार होकर, संकल्प रूपी घोड़ों से जुते हुए, आत्मज्ञानी राजा ऐसे प्रतीत हो रहे थे मानो वे भगवान राम की ओर जा रहे हों।
 
Riding on a chariot made of mind, drawn by the horses of resolutions, the self-enlightened king appeared as if he were going towards Lord Rama. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)