श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 19: रावण को देखकर दुःख, भय और चिन्ता में डूबी हुई सीता की अवस्था का वर्णन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.19.3 
ऊरुभ्यामुदरं छाद्य बाहुभ्यां च पयोधरौ।
उपविष्टा विशालाक्षी रुदती वरवर्णिनी॥ ३॥
 
 
अनुवाद
सुन्दर, तेजस्वी और बड़ी-बड़ी आँखों वाली जानकी ने अपनी जांघों से अपना पेट और अपनी भुजाओं से अपने स्तनों को छिपा लिया और वहीं बैठकर रोने लगी।
 
Janaki, the beautiful radiant and big-eyed one, hid her stomach with her thighs and her breasts with her arms and sitting there, started crying.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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