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ramayan 5.19.18: वह पति से अलग होकर खंभे से बंधी हुई हथिनी के समान गहरी पीड़ा से आहें भर रही थी ॥18॥   |   ramayan सर्ग 5.19: रावण को देखकर दुःख, भय और चिन्ता में डूबी हुई सीता की अवस्था का वर्णन   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.19.18 
गृहीतामालितां स्तम्भे यूथपेन विनाकृताम्।
नि:श्वसन्तीं सुदु:खार्तां गजराजवधूमिव॥ १८॥
 
 
अनुवाद
वह पति से अलग होकर खंभे से बंधी हुई हथिनी के समान गहरी पीड़ा से आहें भर रही थी ॥18॥
 
She was sighing in deep pain like an elephant that has been separated from its husband and tied to a pillar. ॥18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)