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ramayan 5.19.15: हाथी की सूँड़ से मथकर प्रदूषित हो चुकी नदी, जिसके पत्ते और कमल तोड़ लिए गए हों और जिसके जलपक्षी भय से काँप रहे हों, उसी प्रकार सीता सौन्दर्यहीन प्रतीत हो रही थीं।   |   ramayan सर्ग 5.19: रावण को देखकर दुःख, भय और चिन्ता में डूबी हुई सीता की अवस्था का वर्णन   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.19.15 
उत्कृष्टपर्णकमलां वित्रासितविहंगमाम्।
हस्तिहस्तपरामृष्टामाकुलामिव पद्मिनीम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
हाथी की सूँड़ से मथकर प्रदूषित हो चुकी नदी, जिसके पत्ते और कमल तोड़ लिए गए हों और जिसके जलपक्षी भय से काँप रहे हों, उसी प्रकार सीता सौन्दर्यहीन प्रतीत हो रही थीं।
 
Like a churned and polluted river which has been disturbed by an elephant's trunk, whose leaves and lotuses have been plucked and whose water birds have trembled in fear, Sita appeared bereft of beauty.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)