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ramayan 5.19.1-2: उस समय जब सुन्दरी राजकुमारी सीता ने उत्तम आभूषणों से सुसज्जित, सुन्दरता और यौवन से युक्त राक्षसराज रावण को आते देखा, तब वह भय के मारे काँपने लगी, जैसे तेज हवा से हिलता हुआ केले का वृक्ष ॥1-2॥   |   ramayan सर्ग 5.19: रावण को देखकर दुःख, भय और चिन्ता में डूबी हुई सीता की अवस्था का वर्णन   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 19: रावण को देखकर दुःख, भय और चिन्ता में डूबी हुई सीता की अवस्था का वर्णन  »  श्लोक 1-2
 
 
श्लोक  5.19.1-2 
तस्मिन्नेव तत: काले राजपुत्री त्वनिन्दिता।
रूपयौवनसम्पन्नं भूषणोत्तमभूषितम्॥ १॥
ततो दृष्ट्वैव वैदेही रावणं राक्षसाधिपम्।
प्रावेपत वरारोहा प्रवाते कदली यथा॥ २॥
 
 
अनुवाद
उस समय जब सुन्दरी राजकुमारी सीता ने उत्तम आभूषणों से सुसज्जित, सुन्दरता और यौवन से युक्त राक्षसराज रावण को आते देखा, तब वह भय के मारे काँपने लगी, जैसे तेज हवा से हिलता हुआ केले का वृक्ष ॥1-2॥
 
At that time, when the beautiful Princess Sita saw the Demon King Ravana approaching, adorned with the finest ornaments and endowed with beauty and youth, she began to tremble in fear like a banana tree swaying in a strong wind.॥1-2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)