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ramayan 5.18.27: उन सुन्दरी युवतियों से घिरा हुआ प्रतापी राजा रावण उस सुन्दर वन में प्रविष्ट हुआ, जहाँ अनेक प्रकार के पशु-पक्षी अपनी-अपनी भाषा बोल रहे थे।   |   ramayan सर्ग 5.18: अपनी स्त्रियों से घिरे हुए रावण का अशोकवाटिका में आगमन और हनुमान जी का उसे देखना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 18: अपनी स्त्रियों से घिरे हुए रावण का अशोकवाटिका में आगमन और हनुमान जी का उसे देखना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  5.18.27 
ताभि: परिवृतो राजा सुरूपाभिर्महायशा:।
तन्मृगद्विजसंघुष्टं प्रविष्ट: प्रमदावनम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
उन सुन्दरी युवतियों से घिरा हुआ प्रतापी राजा रावण उस सुन्दर वन में प्रविष्ट हुआ, जहाँ अनेक प्रकार के पशु-पक्षी अपनी-अपनी भाषा बोल रहे थे।
 
Surrounded by those beautiful maidens, the illustrious King Ravana entered the beautiful forest where many kinds of animals and birds were speaking in their own languages. 27.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)