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ramayan 5.18.24: उसका वस्त्र दूध के झाग के समान श्वेत, निर्मल और सुन्दर था। उसमें मोती और फूल जड़े हुए थे। वह वस्त्र उसके बाजूबंद में फँसा हुआ था और रावण उसे खोलने के लिए खींच रहा था॥ 24॥   |   ramayan सर्ग 5.18: अपनी स्त्रियों से घिरे हुए रावण का अशोकवाटिका में आगमन और हनुमान जी का उसे देखना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.18.24 
मथितामृतफेनाभमरजोवस्त्रमुत्तमम्।
सपुष्पमवकर्षन्तं विमुक्तं सक्तमंगदे॥ २४॥
 
 
अनुवाद
उसका वस्त्र दूध के झाग के समान श्वेत, निर्मल और सुन्दर था। उसमें मोती और फूल जड़े हुए थे। वह वस्त्र उसके बाजूबंद में फँसा हुआ था और रावण उसे खोलने के लिए खींच रहा था॥ 24॥
 
His dress was white, pure and fine like the foam of churned milk. It had pearls and flowers stitched to it. That dress was entangled in his armlet and Ravana was pulling it to untangle it.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)