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ramayan 5.18.23: वह काम, मद और मद से भरा हुआ था। उसकी आँखें टेढ़ी, लाल और बड़ी थीं। धनुष के बिना वह साक्षात् कामदेव के समान प्रतीत हो रहा था॥ 23॥   |   ramayan सर्ग 5.18: अपनी स्त्रियों से घिरे हुए रावण का अशोकवाटिका में आगमन और हनुमान जी का उसे देखना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.18.23 
कामदर्पमदैर्युक्तं जिह्मताम्रायतेक्षणम्।
समक्षमिव कंदर्पमपविद्धशरासनम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
वह काम, मद और मद से भरा हुआ था। उसकी आँखें टेढ़ी, लाल और बड़ी थीं। धनुष के बिना वह साक्षात् कामदेव के समान प्रतीत हो रहा था॥ 23॥
 
He was filled with lust, pride and intoxication. His eyes were crooked, red and large. Without his bow, he looked like Kamadeva himself.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)