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ramayan 5.18.17: वे सुन्दर मुखवाली स्त्रियाँ मानो मद और निद्रा के अवशेष में झूम रही थीं। उनके शरीर पर धारण किए हुए पुष्प पसीने से भीगे हुए थे और मालाओं से सुशोभित उनके केश कुछ-कुछ लहरा रहे थे॥17॥   |   ramayan सर्ग 5.18: अपनी स्त्रियों से घिरे हुए रावण का अशोकवाटिका में आगमन और हनुमान जी का उसे देखना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 18: अपनी स्त्रियों से घिरे हुए रावण का अशोकवाटिका में आगमन और हनुमान जी का उसे देखना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.18.17 
घूर्णन्त्यो मदशेषेण निद्रया च शुभानना:।
स्वेदक्लिष्टांगकुसुमा: समाल्याकुलमूर्धजा:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
वे सुन्दर मुखवाली स्त्रियाँ मानो मद और निद्रा के अवशेष में झूम रही थीं। उनके शरीर पर धारण किए हुए पुष्प पसीने से भीगे हुए थे और मालाओं से सुशोभित उनके केश कुछ-कुछ लहरा रहे थे॥17॥
 
Those beautiful-faced women were walking as if swaying in the remnants of intoxication and sleep. The flowers worn on their various bodies were wet with sweat and their hair, adorned with garlands, was swaying a little.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)