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ramayan 5.18.12: कुछ सुन्दर स्त्रियाँ स्वर्ण के कलशों में जल लेकर आगे-आगे चल रही थीं और कुछ स्त्रियाँ पीछे-पीछे वृषी नामक गोल मटके लेकर चल रही थीं॥12॥   |   ramayan सर्ग 5.18: अपनी स्त्रियों से घिरे हुए रावण का अशोकवाटिका में आगमन और हनुमान जी का उसे देखना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.18.12 
काञ्चनैश्चैव भृंगारैर्जह्रु: सलिलमग्रत:।
मण्डलाग्रा बृसीश्चैव गृह्यान्या: पृष्ठतो ययु:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
कुछ सुन्दर स्त्रियाँ स्वर्ण के कलशों में जल लेकर आगे-आगे चल रही थीं और कुछ स्त्रियाँ पीछे-पीछे वृषी नामक गोल मटके लेकर चल रही थीं॥12॥
 
Some beautiful women walked ahead, carrying water in golden pots and some other women followed behind, carrying circular mats called bṛsī.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)