श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 16: हनुमान जी का मन-ही-मन सीताजी के शील और सौन्दर्य की सराहना करते हुए उन्हें कष्ट में पड़ी देख स्वयं भी उनके लिये शोक करना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.16.3 
मान्या गुरुविनीतस्य लक्ष्मणस्य गुरुप्रिया।
यदि सीता हि दु:खार्ता कालो हि दुरतिक्रम:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! यदि श्री रामजी की प्रिय पत्नी, लक्ष्मणजी के बड़े भाई, जिन्होंने अपने बड़ों से शिक्षा प्राप्त की है, सीताजी भी ऐसे दुःख में हैं, तो कहना पड़ता है कि काल का उल्लंघन करना किसी के लिए भी बड़ा कठिन है॥3॥
 
Oh! If Sita, the beloved wife of Shri Ram, the elder brother of Lakshman, who has received education from his elders, is also in such grief, then it has to be said that it is very difficult for anyone to transgress the time.॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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