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ramayan 5.16.29: अरे! जो सीता पृथ्वी के समान क्षमाशील हैं, जिनके नेत्र कमल के समान हैं, तथा जिनकी रक्षा भगवान राम और लक्ष्मण ने सदैव की है, वही सीता आज इस वृक्ष के नीचे बैठी हैं और ये भयंकर नेत्रों वाली राक्षसियाँ उनकी रक्षा कर रही हैं।   |   ramayan सर्ग 5.16: हनुमान जी का मन-ही-मन सीताजी के शील और सौन्दर्य की सराहना करते हुए उन्हें कष्ट में पड़ी देख स्वयं भी उनके लिये शोक करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.16.29 
क्षितिक्षमा पुष्करसंनिभेक्षणा
या रक्षिता राघवलक्ष्मणाभ्याम्।
सा राक्षसीभिर्विकृतेक्षणाभि:
संरक्ष्यते सम्प्रति वृक्षमूले॥ २९॥
 
 
अनुवाद
अरे! जो सीता पृथ्वी के समान क्षमाशील हैं, जिनके नेत्र कमल के समान हैं, तथा जिनकी रक्षा भगवान राम और लक्ष्मण ने सदैव की है, वही सीता आज इस वृक्ष के नीचे बैठी हैं और ये भयंकर नेत्रों वाली राक्षसियाँ उनकी रक्षा कर रही हैं।
 
Oh! The same Sita who is as forgiving as the earth and has eyes like blooming lotus flowers and who has always been protected by Lord Rama and Lakshmana, is today sitting under this tree and these demonesses with fierce eyes are guarding her.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)