श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 16: हनुमान जी का मन-ही-मन सीताजी के शील और सौन्दर्य की सराहना करते हुए उन्हें कष्ट में पड़ी देख स्वयं भी उनके लिये शोक करना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  5.16.28 
इमामसितकेशान्तां शतपत्रनिभेक्षणाम्।
सुखार्हां दु:खितां ज्ञात्वा ममापि व्यथितं मन:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
काले केशों और कमल के समान नेत्रों वाली यह सीता सचमुच सुख भोगने योग्य है। यह जानकर मेरा हृदय भी दुःखी हो रहा है कि यह दुखी है॥ 28॥
 
This Sita with her black hair and eyes like lotus flower is truly worthy of enjoying happiness. My heart also becomes saddened to know that she is unhappy.॥ 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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