Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.16.26: निश्चय ही स्त्री के लिए पति आभूषणों से भी अधिक सुन्दर है। सीता अपने पति से वियोगी हो गई है, इसीलिए सुन्दर होने के योग्य होने पर भी सुन्दर नहीं है॥ 26॥ | ramayan सर्ग 5.16: हनुमान जी का मन-ही-मन सीताजी के शील और सौन्दर्य की सराहना करते हुए उन्हें कष्ट में पड़ी देख स्वयं भी उनके लिये शोक करना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भर्ता नाम परं नार्या: शोभनं भूषणादपि।
एषा हि रहिता तेन शोभनार्हा न शोभते॥ २६॥
अनुवाद
निश्चय ही स्त्री के लिए पति आभूषणों से भी अधिक सुन्दर है। सीता अपने पति से वियोगी हो गई है, इसीलिए सुन्दर होने के योग्य होने पर भी सुन्दर नहीं है॥ 26॥
‘Certainly, a husband is more beautiful than ornaments for a woman. Sita has been separated from her husband and that is why she is not beautiful even though she deserves to be beautiful.॥ 26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥